શ્રેણી: કુરઆને શરીફ
લેખક: मुहद्दिसे जलील अल अल्लामा अल खबीर अल शैख़ अब्दे अली बिन जुमअतुल उरूसी अल हुवैज़ी (क़ुदस सि).
વિષયો
अर्ज़े नाशिर (किताब छपवाने वाले की कुछ बातें)
1 પ્રકરણો
क़ुरआन की अज़मत अमीरुल मोमेनीन (अ.स.) की ज़ुबाने मुबारक से.
अमीरुल मोमेनीन (अ.स.) कि ज़ुबानी क़ुरआनी ओलूम का खाका (खुलासा)
पहला हर्फ़ (मुतर्जिम का इस तफ़सीर के बारे में एक छोटा सा मज़मून)
Surah Hamd | सूरे हम्द की तफ़सीर व फ़ज़ाएल
Surah Bakrah A.1 to 5 | सूरे बक़रा आयत 1 से 5 तक का तर्जुमा व तफ़सीर
Surah Bakrah A.6 to 20 | सूरे बक़रा के फ़ज़ाएल
Surah Bakrah A.21 to 22 | खुदा की क़ुदरत
Surah Bakrah A.23 to 39 | ज़मीन की मसलेहतें (यानी अल्लाह ने इंसानी जिंदगी के लिए ज़मीन को कैसा बनाया है)
Surah Bakrah A.40 to 46 | अंबिया की इस्मत
Surah Bakrah A.47 to 49 | अली (अ.स.) की विलायत अहदे खुदा (यानी खुदा के वादे) में शामिल है
नमाज़ व ज़कात का फ़लसफ़ा
बे अमल खतीब
अक़्ल
लक़ाऐ रब का मफ़हूम (रब से मुलाक़ात करने का मानी)
Surah Bakrah A.50 to 61 | बनी इस्राईल और मूसा (अ.स.)
गौशाला परस्तों का अंजाम
अल्लाह को देखने के लिए ज़िद करने वालों का अंजाम
बादलों का साया और मन्नो सल्वा (खुदा कि तरफ़ से आसमानी खाना) का नाज़िल होना
बाबे हित्तह
आं हज़रत (स.अ.व.) का मोअजिज़ा
Surah Bakrah A.61 to 73 | क्या तमाम यहूदी अंबिया के क़ातिल थे?
Surah Bakrah A.74 to 81 | बनी इस्राईल की गाय का वाक़ेआ
यहूदियों के दिल की सख्ती
Surah Bakrah A.82 to 86 | दिल की सख्ती और उसके असबाब
जन्नत व दोज़ख में हमेशा रहने की वजह
Surah Bakrah A.87 to 90 | रूहुल क़ुद्स
2 પ્રકરણો
Surah Bakrah A.90 to 98 | यहूदियों ने मदीने में रहना क्यूं अख्तियार किया था?
किसी के काम पर राज़ी होने वाला भी उसमें शरीक है
मौत की तमन्ना
यहूदियों को जब्रईल (अ.स.) से अदावत क्यूं थी?
नासबियों और यहूदियों की सोच में एकता
Surah Bakrah A.99 to 103 | किताबे खुदा को छोड़ने की शकलें
हारूत और मारूत का वाक़ेआ
हारूत व मारूत के मुतअल्लिक़ एक ग़लत बात की रद
मलाएका की इस्मत
हज़रत सुलैमान (अ.स.) के बाद जादू का राज (दौर दौरा)
Surah Bakrah A.104 to 129 | अदबे रसूल (स.अ.व.) का तक़ाज़ा. (नबी का अदब व ऐहतराम क्यों ज़रूरी है).
नुबूवत रहमत है.
नासिख व मनसूख. (का मतलब).
यहूद व नसारा की खुश फ़हमी.
जन्नत आमाल का बदला है.
जिदाले अहसन जाएज़ है (यानी अच्छा बहस व मुबाहसा)
शूरा के दिन हज़रत अली (अ.स.) का ऐहतजाज
मस्जिदों से मना करने वाला बहुत बड़ा ज़ालिम है.
खुदा हर तरफ़ मौजूद है
क्या दो क़िबले मुक़र्रर करने से अल्लाह पर इल्ज़ाम आता है?
दीन के तमाम हादी भी मजाज़ी तौर पर ‘’वजहुल्लाह’’ हैं.
खुदा के यहाँ कोई अव्लाद नहीं.
अल्लाह ने ‘’किसी पहले की मिसाल’’ के बग़ैर काएनात को बनाया.
किताब की तिलावत का हक़
इमामते इब्राहीम (अ.स.)
बुत परस्त कलमा पढकर मुसलमान बन सकता है लेकिन इमाम नहीं बन सकता
अज़मते बैतुल्लाह
ताऐफ़ का नाम ताऐफ़ क्यूं रख्खा गया
इमाम ज़ैनुल आबदीन (अ.स.) और काबे की संगे बुनियाद
Surah Bakrah A.130 to 141 | ज़ुर्रीयते इब्राहीम (अ.स.) में से उम्मते मुसलमह
चचा भी वालिद के क़ाऐम मक़ाम होता है
दीन के तमाम हादी मिसाली मोमिन थे
इस्लाम और विलायत ही खुदाई रगं है
ज़रूरत के वक्त गवाही छुपाना हराम है.
Surah Bakrah A.142 to 152 | तहवीले क़िबला. (यानी क़िबला का बदलना)
दरमियानी उम्मत. (बीच वाली उम्मत का मतलब)
तहवीले क़िबला से ईमान वालों का इम्तिहान व आज़माइश मुराद थी.
अहले किताब जानते थे कि तहवीले क़िबला हक़ है.
क़ाएमे आले मोहम्मद (अ.स.) की पेशिन गोई
Surah Bakrah A.153 to 158 | ज़िक्रे खुदा
अहले ईमान की आज़माइश
सफ़ा व मरवा की पहाडियां.
सई का आग़ाज़ सफ़ा से करना चाहिए.
Surah Bakrah A.159 to 172 | ओलमाए सू (बुरे आलिम) मलऊन हैं.
मज़ाहिरे फ़ितरत (क़ुदरती जल्वे) आयाते इलाही हैं.
तमाम मसनूआत सानेअ (यानी हर बनाई गई चीज़ बनाने वाले) की दलील हैं.
क़यामत के दिन झूठे पीर अपने मुरीदों से बेज़ारी (दूरी) का ऐलान करेंगे.
कंजूस दौलतमन्द क़यामत में हसरत यानी अफ़सोस करेगा.
शैतान के नक़्शे क़दम पर (शैतान के रास्ते पर) मत चलो.
इस्लाम की दावत देने का काफिरों पर कोई असर नहीं होता.
Surah Bakrah A.173 to 182 | मुर्दार और खून वग़ैरा क्यूं हराम हैं?
बाग़ी कौन और आदी कौन है?
लव ला अली लहलकल उमर.
क़सास (बदला).
मुआफ़ी की सूरत में. (यानी अगर हक़दार अपना हक़ मुआफ़ करदे तो उसका क्या हुक्म है).
क़सास में जिंदगी छुपी हुई है.
वसीयत.
जब वसीयत से हक़ पामाल हो रहा हो तो उसमें रद्द व बदल करना दुरुस्त है.
Surah Bakrah A.183 to 185 | रोज़ा.
रोज़ों का फ़लसफ़ा.
बीमार और मुसाफ़िर के लिए रिआयत (छूट).
खुदा की अता करदह रुखसत (यानी छूट) को ठुकराना कुफ्राने नेअमत है.
अज़मते रमज़ान.
क़ुरआन के मर्कज़ी (अस्ली) मौज़ूआत.
क़ुरआन और फ़ुरक़ान का फ़र्क.
माहे रमज़ान में बग़ैर ज़रूरत सफ़र न किया जाए.
खुदा आसानी चाहता है तंगी नहीं चाहता.
ईदुल फित्र की तकबीरात.
Surah Bakrah A.186 to 188 | खुदा क़रीब है और वह दुआओं को क़बूल करता है.
माहे रमज़ान में ज़ौजीय्यत के हुक़ूक़ की अदाएगी हलाल है.
Surah Bakrah A.189 to 195 | बातिल तरीक़े से माल खाने को मना किया गया है.
चांद शरई वक़तों का ज़रीया है.
घर में दरवज़े से दाखिल होना चाहिए.
हुक्मे जिहाद.
अपने आपको क़लाश (बेग़ैरत बनाना) और खुद कुशी करना हराम है.
Surah Bakrah A.196 to 198 | खुदा भलाई करने वालों से मुहब्बत रखता है.
हज व उमरा के अहकाम.
अगर रास्ते में रुकावट पेश आ जाए तो?
हज्जे रसूल (स.अ.व.).
वक्त से पहले सर मुंडवाना.
फ़ज़्ले खुदावन्दी का मफ़हूम.
Surah Bakrah A.198 to 199 | इफ़ाज़ा का हुक्म (यानी फ़ाएदा पहुंचाने का हुक्म).
अरफ़ात नाम रखने की वजह.
रसूले खुदा (स.अ.व.) ने फ़ाएदा कैसे पहुंचाया?
Surah Bakrah A.201 | अहले ईमान की दुआ.
Surah Bakrah A.204 to 206 | झगडालू दुश्मन.
Surah Bakrah A.207 | मरज़ाते इलाही का खरीदार.
Surah Bakrah A.208 to 215 | इस्लाम में मुकम्मल दाखिल होने का मक़सद.
मुशरकीन को किस बात का इन्तिज़ार है?
शैतान का नक्शे क़दम.
बेअसते अंबिया (अ.स.).
पहले वाली उम्मत पर ज़ुल्म व सितम के पहाड़ गिराए गए थे.
माली इमदाद के हक़दार.
Surah Bakrah A.216 to 221 | शराब की तदरीजी हुरमत (धीरे धीरे करके हराम किया गया).
कितनी दौलत राहे खुदा में खर्च की जाए?
यतीम की परवरिश.
Surah Bakrah A.222 to 225 | माहवारी (औरतों के पीरियड) के मुतअल्लिक़ हिदायात.
बीवी खेती है.
क़सम की अहमीयत.
Surah Bakrah A.226 to 232 | ईला (यानी शौहर क़सम खाए कि वह अपनी बीवी से हमबिस्तरी नहीं करेगा) के अहकाम.
इद्दते तिलाक़.
औरत अपने हमल, हैज़ और पाकी को न छुपाए.
मीया बीवी के हुक़ूक़ व फ़राऐज़.
तिलाक़ का सुन्न्ती तरीक़ा.
खुलअ.
हुदूदे खुदा से आगे बढ़ना हराम है.
क्या दोबारा रुजूअ के लिए मुतआ काफ़ी है.
औरतों को सताने के लिए मत रोको.
आयाते इलाही को मज़ाक़ न बनाओ.
Surah Bakrah A.233 to 237 | दूध पिलाने के अहकाम.
बेवा का इशारों किनायों से चाहना.
ज़ुफ़ाफ़ (हमबिस्तरी) से पहले तिलाक़ के मसाएल.
ऐतदाल (बीच वाले रास्ते) को अपनाया जाए.
औरत और उसके वली को हक़्क़े महर मुआफ़ करने का हक़ है.
किसी की मजबूरी से नाजाएज़ फ़ायदा उठाना ग़लत है.
Surah Bakrah A.238 to 252 | नमाज़ों की मुहाफ़ज़त करो और नमाज़े वुस्ता की मुहाफ़ज़त करो.
वफ़ात और तिलाक़ के कुछ अहकाम.
मौत से भागने वालों का अंजाम.
खुदा को क़र्जे हसना देने वाले.
रिज़्क़ की कमी और ज़्यादती खुदा के हाथ में है.
तालूत व जालूत का क़िस्सा और खुदा के इंतखाब का मेअयार (मानक - स्तर).
एक धागे से ज़लज़ला बरपा करना.
Surah Bakrah A.253 to 257 | नेक लोगों की बरकत.
रूहुल क़ुद्स.
दरिंदों से हिफ़ाज़त की अज़ीमत (अज़्म, इरादा).
आसेब (जादू टोने) से नजात.
आयतुल कुर्सी के फ़ज़ाएल.
हय्यो क़य्यूम (का मानी).
अर्श व कुर्सी (क्या है).
उर्वतुल वुस्क़ा (का मानी).
नूर व ज़ुलमत.
विलायत का इनकार करने वालों के अमल की कोई अहमीय्यत नहीं.
Surah Bakrah A.258 to 260 | इब्राहीम (अ.स.) व नमरूद.
सौ बरस की मौत के बाद ज़िंदा होने वाला.
इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ.स.) और एक नसरानी पादरी का मुबाहसा.
अंबिया की इस्मत और इब्राहीम (अ.स.) के लिए चार परिंदों का ज़िंदा होना.
क़ालीन के शेर का अस्ली शेर बन जाना.
लफ़्ज़े ‘’जुज़’’ का मानी व मफ़हूम.
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) का मोअजिज़ा.
Surah Bakrah A.261 to 274 | अल्लाह की राह में खर्च करना.
ऐहसान जतलाने और दुख देने से नेकी बरबाद हो जाती है.
रियाकारी के जज़बे से दी जाने वाली खैरात क़ाबिले क़बूल नहीं है.
अल्लाह की राह में हलाल और उम्दा चीज़ खर्च करो.
शैतान ग़ुरबत से डराता है.
हिकमत खैरे कसीर है.
अलानिया और छुपा के सदक़ा देना.
करम पेशऐ शाहे मरदां अली (अ.स.). (यानी अली अ.स. का करम)
Surah Bakrah A.275 to 284 | सूद और सूद खाने वाले को तंबीह.
सूद क्यूं हराम है?
सूद बरबादी का ज़रीया और सदक़ात रिज़्क़ में इज़ाफ़ा का ज़रीया है.
सूद को छोड़ना ईमान की शर्त है.
तंग दस्त मक़रूज़ को मोहलत देनी चाहिये.
क़र्ज़ को लिखना चाहिए और गवाह मुक़र्रर करने चाहिए.
गवाही से इनकार करना जुर्म है.
Surah Bakrah A.285 to 286 | ईमान का वह हिस्सा जो दिल से मखसूस है.
पहले की उम्मत के वह बोझ जो उम्मते मुस्तफ़ा (स.अ.व.) से हटाए गए हैं.
પ્રકરણો
મહત્વપૂર્ણ લિંક્સ
http://www.amillibrary.com
http://hajinaji.imperoserver.in/admin/important-links/create
આપણા સમુદાય સાથે જોડાવા અને એપ્લિકેશનનું અન્વેષણ કરવા માટે તમારો ફોન નંબર દાખલ કરો.
01:59 માં OTP ફરીથી મોકલો
કોડ મળ્યો નથી? ફરીથી મોકલો